बेगाना

Stranger — a Hindi poem about a love that was never acknowledged.
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Stranger

माना कभी अपना न बन सके पर उसने कभी बेगाना भी तो नहीं कहा
हसते रहे रोते रहे और क्या करते उसने कभी चुप होजाना भी तो नहीं कहा
प्यार तो करते हैं हम एक ज़माने से पर उसने कभी दीवाना भी तो नहीं कहा
देख कर हमें चाहे मुह फिर लिया पर उसने कभी हमें अंजना भी तो नहीं कहा
सोचा फिर एक दिन कि मर जाएँ पर उसने कभी मरजाना भी तो नहीं कहा|

अनंत आनंद गुप्ता

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