जाम ए शाम
A Goblet in the Evening — a Hindi poem about an evening that lingered.
ना पैमाना लबों तक पंहुचा
ना ही पीया हमने कोई ज़ाम
बहोत ख़ूब गुज़री फिर भी
नशे मैं रहे हम कल की शाम
अनंत आनंद गुप्ता