ख़्वाब (Dream)

कुछ ख़्वाब थे मेरे अनकहे
देखे थे जो आँखे बंद करे … खुली आँखो में भी बसे रहे
बहुत कुछ जुड़ा है तुझसे
आज बयाँ करने की सोची … पर ना जाने लव्ज़ कहाँ गये
सकूं नहीं मिलता क्यों
तू सामने बैठा रहे यूँही … और बस हम तुझे देखते रहे
जिंदगी गुज़र जायेगी शायद
हमें तुमसे प्यार है … ये हम आज कहें की कल कहें