जाम ए शाम

ना पैमाना लबों तक पंहुचा
ना ही पीया हमने कोई ज़ाम
बहोत ख़ूब गुज़री फिर भी
नशे में रहे हम कल की शाम

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *