चाहत

तुम्हे बस चाहते जाने को जी चाहता है
आज कुछ कर जाने को जी चाहता है
तुम्हारे संग जीने को जी चाहता है
तुम पर मिट जाने को जी चाहता है
चाहते हैं हम तुम्हे जितना उतना
आज बस कह जाने को जी चाहता है
हमें चाहत हो सिर्फ तुम्हारी
ऐसी चाहत हो ये जी चाहता है
दिल पर ज़ोर नही है पर
ये दिल सिर्फ तुम्हे चाहे ये जी चाहता है
महोब्बत की ग़र कोई हद होती है तो
आज उस हद से गुज़र जाने को जी चाहता है
जो देखा तुमको एक बार हमने
तो अब देखते जाने को जी चाहता है

होश

होश वालों शिक्वा ना करो
हम भी होश की बातें करेंगे हमें ज़रा होश में तो आने दो
ख़्वाब लेने का हक सबका है
ख़्वाब होंगे हमारे भी सच्चे ज़रा झूठे ख्वाब से बाहर तो आने दो

राज़

राज़ क्या है जिंदगी का नहीं ये कोई भी जान पाया
कहीं ख़ुशी का उजाला है तो कहीं ग़मों का काला साया
कहीं खुद ही से लड़ती रूह है तो कहीं जलती हुई नश्वर काया
इक वृत्त जैसी लगती है कि खो जाती है वैसे, जैसे था पाया
क्यों भटके है तू राही कि इक ही ओर इसने सबको ले जाना
बचपना है कि हर चीज़ पाने को मचले सब जानती है कि बुढ़ापा है छाया
राज़ क्या है जिंदगी का नहीं ये कोई भी जान पाया